खून की जाँच किसी बीमारी का नाम नहीं लिखती; वह सिर्फ़ यह बताती है कि शरीर के किस हिस्से पर ध्यान देना चाहिए। नीचे भारत में सबसे ज़्यादा खोजी जाने वाली स्थितियाँ हैं, और हर एक के साथ वे पैरामीटर जो उसकी तस्वीर बनाने में हिस्सा डालते हैं।
आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया
भारत में सबसे आम कमी, ख़ासकर किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन के साथ छोटा MCV, बढ़ा RDW और घटा फेरिटिन मिलकर भंडार ख़ाली होने का संकेत देते हैं, पर कारण ढूँढ़ना डॉक्टर का काम रहता है।
HemoglobinMCVRDWFerritinSerum IronTIBC
थैलेसीमिया ट्रेट
भारत के कई समुदायों में यह वंशानुगत लक्षण आम है और अक्सर आयरन की कमी समझकर वर्षों तक गोली खाई जाती है। यहाँ MCV बहुत कम होने के बावजूद लाल कोशिकाओं की संख्या ठीक या ऊँची रहती है और फेरिटिन सामान्य मिलता है, जिसके बाद हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस की बात आती है।
HemoglobinMCVMCHTotal RBC CountRDWFerritin
विटामिन B12 की कमी
थकान, हाथ-पैर में झुनझुनी और भुलक्कड़पन के पीछे यह कमी शाकाहारी आहार वाले भारत में बहुत आम है। रिपोर्ट में B12 का स्तर सीधा मापा जाता है, जबकि बड़ा MCV और गिरता हीमोग्लोबिन बताते हैं कि कमी ने खून बनने पर असर डालना शुरू कर दिया है।
Vitamin B12MCVHemoglobinPlatelet Count
विटामिन D की कमी
हड्डियों और पिंडलियों का दर्द, कमज़ोरी और थकान इसके साथ जुड़े रहते हैं, और दफ़्तर में बैठकर काम करने वाले भारतीय शहरी लोगों में यह बेहद आम है। मापा भंडारित रूप यानी Vitamin D (25-OH) जाता है, जबकि ALP और कैल्शियम बताते हैं कि हड्डी का चयापचय भी प्रभावित हुआ या नहीं।
Vitamin D (25-OH)Serum CalciumAlkaline Phosphatase
प्रीडायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़
भारतीयों में शुगर की गड़बड़ी अक्सर कम उम्र और कम वज़न पर ही शुरू हो जाती है। फास्टिंग शुगर, खाने के बाद की शुगर और HbA1c एक साथ पढ़े जाने पर ही भरोसेमंद तस्वीर बनती है, और निदान की पुष्टि डॉक्टर दोहराई गई जाँच पर करता है।
Fasting Blood SugarPost Prandial Blood SugarHbA1cTriglycerides
फैटी लिवर
बिना शराब पिए भी लिवर में चर्बी जमना अब भारत में सबसे आम लिवर समस्या है और प्रायः किसी चेकअप में संयोग से पकड़ा जाता है। हल्का बढ़ा SGPT, उससे कम बढ़ा SGOT और साथ चलते ट्राइग्लिसराइड व HbA1c मिलकर शक पैदा करते हैं, जिसकी पुष्टि अल्ट्रासाउंड से होती है।
SGPTSGOTGamma GTTriglyceridesHbA1c
पीलिया और हेपेटाइटिस
आँखों और पेशाब का पीला होना बिलीरुबिन बढ़ने का संकेत है, जिसके कारण वायरल हेपेटाइटिस से लेकर पित्त की नली में रुकावट तक हो सकते हैं। कुल और डायरेक्ट बिलीरुबिन का अनुपात, एंज़ाइम की ऊँचाई और ALP मिलकर दिशा तय करते हैं, पर वायरस की पहचान अलग जाँच से होती है।
Total BilirubinDirect BilirubinSGPTSGOTAlkaline Phosphatase
हाइपोथायरॉइडिज़्म और हाइपरथायरॉइडिज़्म
थकान, वज़न बढ़ना और ठंड न सह पाना कम सक्रिय थायरॉइड की ओर जाते हैं; धड़कन तेज़ होना, घबराहट और वज़न घटना उलटी दिशा में। TSH पहला संकेत देता है और Free T4 बताता है कि गड़बड़ी कितनी गहरी है।
TSHFree T4Total CholesterolHemoglobin
क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़
लंबी डायबिटीज़ और बीपी के बाद किडनी की छानने की क्षमता चुपचाप घटती है और शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होता। क्रिएटिनिन के साथ eGFR की गिरावट, बढ़ी यूरिया और साथ चलता एनीमिया मिलकर तस्वीर बनाते हैं, जिसे पेशाब की जाँच और दोहराए माप के बिना पक्का नहीं कहा जाता।
Serum CreatinineeGFRBlood UreaSerum PotassiumHemoglobin
डेंगू
मानसून के बाद भारत में यह सबसे आम बुखार बन जाता है और CBC में इसकी छाप ख़ास होती है। प्लेटलेट और श्वेत कोशिकाओं का एक साथ गिरना, PCV का बढ़ना और हल्का बढ़ा SGPT संकेत देते हैं, जबकि पुष्टि NS1 या एंटीबॉडी जाँच से होती है।
Platelet CountTotal Leucocyte CountPCVLymphocytesSGPT
टाइफ़ॉइड और बैक्टीरियल संक्रमण
लगातार बुखार में बैक्टीरियल वजह सोचते समय श्वेत कोशिकाओं का बढ़ना और न्यूट्रोफिल का हिस्सा बढ़ना दिशा देते हैं, हालाँकि टाइफ़ॉइड में गिनती उलटा कम भी हो सकती है। CRP तेज़ी से बढ़ता है, पर जीवाणु की पहचान कल्चर या Widal जैसी अलग जाँच से ही होती है।
Total Leucocyte CountNeutrophilsC-Reactive ProteinESR
टीबी और लंबी चलने वाली सूजन
हफ़्तों की खाँसी, हल्का बुखार और वज़न घटना भारत में टीबी की आशंका उठाते हैं। खून की जाँच इसे कभी साबित नहीं करती, पर लगातार ऊँचा ESR, घटा हीमोग्लोबिन, कम एल्ब्युमिन और बढ़े मोनोसाइट यह बताते हैं कि शरीर में कोई लंबी प्रक्रिया चल रही है।
ESRHemoglobinAlbuminMonocytesC-Reactive Protein
गाउट और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड
अंगूठे या टख़ने के जोड़ में रात को अचानक तेज़ दर्द गाउट का चिर-परिचित रूप है। सिर्फ़ यूरिक एसिड ऊँचा होना गाउट नहीं कहलाता, और दौरे के समय तो यह सामान्य तक दिख सकता है, इसलिए CRP, ESR और किडनी के मान साथ देखे जाते हैं।
Uric AcidC-Reactive ProteinESRSerum Creatinine
डिसलिपिडेमिया और हृदय रोग का ख़तरा
भारतीयों में हृदय रोग औसतन दस साल पहले शुरू होता है, और इसमें ऊँचे ट्राइग्लिसराइड के साथ कम HDL का मेल ख़ास तौर पर देखा जाता है। लिपिड प्रोफ़ाइल अकेले ख़तरा नहीं बताती; उम्र, बीपी, धूम्रपान और शुगर के साथ मिलाकर ही डॉक्टर जोखिम आँकते हैं।
LDL CholesterolHDL CholesterolTriglyceridesTotal CholesterolHbA1c
ईओसिनोफीलिया — कृमि संक्रमण और एलर्जी
भारतीय रिपोर्ट में बढ़े हुए ईओसिनोफिल बहुत आम हैं और इनके पीछे पेट के कीड़े, त्वचा की एलर्जी या दमा हो सकता है। गिनती के साथ हीमोग्लोबिन देखना ज़रूरी है, क्योंकि लंबे कृमि संक्रमण में खून की कमी भी साथ चलती है।
EosinophilsTotal Leucocyte CountHemoglobinFerritin