पैरामीटर और बीमारियाँ

ब्लड टेस्ट के पैरामीटर और उनसे जुड़ी बीमारियाँ

यह पन्ना उन्हीं पैरामीटर को इकट्ठा करता है जो भारत की लैब रिपोर्ट पर सचमुच छपते हैं, और उसी क्रम में जिस क्रम में वे शीट पर आते हैं। यह उस हर व्यक्ति के लिए है जिसके हाथ में हेल्थ चेकअप या किसी एक टेस्ट की रिपोर्ट है और जो जानना चाहता है कि हर पंक्ति आख़िर माप क्या रही है।

लैब के पैरामीटर

रिपोर्ट के क्रम में सभी पैरामीटर

भारतीय रिपोर्ट लगभग हमेशा CBC से शुरू होती है और थायरॉइड, विटामिन तथा सूजन के मार्कर पर ख़त्म होती है। नीचे के छह खंड उसी क्रम में हैं, ताकि आप अपनी शीट बग़ल में रखकर पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाते जा सकें।

कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)

Hemoglobin Hb
लाल कोशिकाओं में ऑक्सीजन ढोने वाला रंगद्रव्य; एनीमिया की पहचान यहीं से शुरू होती है, सीमा पुरुष-महिला में अलग है। गाइड पढ़ें
Total RBC Count RBC
प्रति माइक्रोलीटर लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या; अकेली कम बोलती है, हीमोग्लोबिन और इंडाइसेस के साथ ही पढ़ी जाती है। गाइड पढ़ें
Packed Cell Volume PCV / HCT
खून के आयतन में कोशिकाओं का प्रतिशत; एनीमिया में गिरता है, पर पानी की कमी में झूठा ऊँचा दिखता है। गाइड पढ़ें
Mean Corpuscular Volume MCV
लाल कोशिका का औसत आकार; आयरन की कमी और थैलेसीमिया में छोटा, B12 की कमी में बड़ा हो जाता है। गाइड पढ़ें
Mean Corpuscular Hemoglobin MCH
हर लाल कोशिका में हीमोग्लोबिन की मात्रा; प्रायः MCV के साथ चलती है और एनीमिया का प्रकार पक्का करती है। गाइड पढ़ें
Mean Corpuscular Hb Concentration MCHC
कोशिका के भीतर हीमोग्लोबिन का घनत्व; हाइपोक्रोमिक और नॉर्मोक्रोमिक एनीमिया को अलग करने में काम आता है। गाइड पढ़ें
Red Cell Distribution Width RDW
लाल कोशिकाओं के आकार की असमानता; आयरन का भंडार घटते ही यह अक्सर MCV से पहले बढ़ जाता है। गाइड पढ़ें
Total Leucocyte Count TLC / WBC
कुल श्वेत कोशिकाओं की गिनती; बैक्टीरियल संक्रमण में बढ़ती है, पर डेंगू और टाइफ़ॉइड में उलटा घट जाती है। गाइड पढ़ें
Platelet Count PLT
खून जमाने वाली कोशिकाएँ; डेंगू में तेज़ गिरावट इनकी पहचान है, इसलिए एक बार नहीं, दोहराकर देखी जाती हैं। गाइड पढ़ें

डिफरेंशियल काउंट और ESR

Neutrophils
श्वेत कोशिकाओं का सबसे बड़ा हिस्सा; बैक्टीरियल संक्रमण में इनका प्रतिशत और निरपेक्ष संख्या दोनों तेज़ी से बढ़ते हैं। गाइड पढ़ें
Lymphocytes
वायरस से लड़ने वाली कोशिकाएँ; वायरल बुखार में इनका अनुपात बढ़ा और न्यूट्रोफिल का घटा हुआ दिखता है। गाइड पढ़ें
Monocytes
पुरानी सूजन और ऊतकों की सफ़ाई से जुड़ी कोशिकाएँ; टीबी जैसे लंबे संक्रमण में इनका हिस्सा बढ़ सकता है। गाइड पढ़ें
Eosinophils
एलर्जी और कृमि संक्रमण में बढ़ने वाली कोशिकाएँ; भारत में पेट के कीड़ों के कारण आज भी ऊँची मिलती हैं। गाइड पढ़ें
Basophils
सबसे छोटा अंश; एलर्जिक प्रतिक्रिया और कुछ अस्थि-मज्जा विकारों में हल्का बढ़ता है, अकेले शायद ही निर्णायक होता है। गाइड पढ़ें
Erythrocyte Sedimentation Rate ESR
नली में लाल कोशिकाओं के बैठने की गति; धीरे बदलती है, इसलिए लंबी चलने वाली सूजन देखने के लिए उपयोगी।

लिवर फ़ंक्शन टेस्ट (LFT)

Total Bilirubin
लाल कोशिकाओं के टूटने से बना पित्त वर्णक; बढ़ने पर आँखें और त्वचा पीली पड़ती हैं, यानी पीलिया दिखता है।
Direct Bilirubin
लिवर में संसाधित हो चुका हिस्सा; कुल बिलीरुबिन में इसका अनुपात पीलिया का कारण अलग करने में मदद करता है।
SGOT AST
लिवर का एंज़ाइम जो हृदय और मांसपेशियों में भी है; भारी कसरत के बाद भी बढ़ा मिल सकता है।
SGPT ALT
लिवर कोशिका के लिए सबसे ख़ास एंज़ाइम; हल्का-सा लगातार बढ़ा रहना भारत में फैटी लिवर की ओर इशारा करता है।
Alkaline Phosphatase ALP
पित्त नलिकाओं और हड्डी से आने वाला एंज़ाइम; बढ़ते बच्चों और किशोरों में स्वाभाविक रूप से ऊँचा रहता है।
Gamma GT GGT
पित्त-मार्ग का संवेदनशील एंज़ाइम; शराब और कुछ दवाओं के असर पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला मान है।
Total Protein
खून के सभी प्रोटीन का जोड़; लिवर की बनाने की क्षमता और पोषण की स्थिति की मोटी तस्वीर देता है।
Albumin
लिवर में बनने वाला मुख्य प्रोटीन; लंबी बीमारी, कुपोषण और सूजन में घटता है, इसलिए यह धीमा संकेतक है।

किडनी फ़ंक्शन टेस्ट (KFT)

Blood Urea
प्रोटीन के टूटने से बना अपशिष्ट; पानी की कमी और ज़्यादा प्रोटीन से भी बढ़ता है, सिर्फ़ किडनी से नहीं।
Blood Urea Nitrogen BUN
यूरिया में मौजूद नाइट्रोजन; क्रिएटिनिन से इसका अनुपात निर्जलीकरण को किडनी रोग से अलग करने में मदद करता है।
Serum Creatinine
मांसपेशियों से बना अपशिष्ट जिसे किडनी छानती है; कम मांसपेशी वाले लोगों में सामान्य दिखकर भ्रम पैदा कर सकता है।
Estimated GFR eGFR
क्रिएटिनिन, उम्र और लिंग से निकाली गई किडनी की अनुमानित छानने की दर; अकेले क्रिएटिनिन से ज़्यादा भरोसेमंद है।
Uric Acid
प्यूरीन के चयापचय का अंतिम उत्पाद; ऊँचा होने पर भी हर व्यक्ति को गाउट का दौरा कभी नहीं पड़ता।
Serum Sodium Na
शरीर के जल संतुलन का मुख्य इलेक्ट्रोलाइट; उल्टी, दस्त और कुछ दवाओं से कुछ ही दिनों में बदल जाता है।
Serum Potassium K
हृदय की धड़कन के लिए निर्णायक इलेक्ट्रोलाइट; नमूना लेते समय टूटी कोशिकाएँ इसे झूठा ऊँचा दिखा सकती हैं।
Serum Calcium Ca
हड्डी, नस और मांसपेशी के काम का खनिज; एल्ब्युमिन कम हो तो इसका मान भी कम दिखता है, साथ पढ़ें।

शुगर और लिपिड प्रोफ़ाइल

Fasting Blood Sugar FBS
आठ से बारह घंटे उपवास के बाद मापी गई शुगर; ख़राब नींद, तनाव और बीमारी से भी हिल जाती है।
Post Prandial Blood Sugar PPBS
खाने के दो घंटे बाद की शुगर; भारतीय आहार में गड़बड़ी फास्टिंग से पहले इसी मान में पकड़ी जाती है।
HbA1c
पिछले दो-तीन महीनों की औसत शुगर; एनीमिया और थैलेसीमिया में यह मान भ्रामक हो सकता है।
Total Cholesterol
खून का कुल कोलेस्ट्रॉल; अकेला यह आँकड़ा कम बताता है, अंशों में बाँटकर पढ़ना ही काम का होता है।
LDL Cholesterol LDL
धमनी की दीवार में जमने वाला अंश; हृदय रोग का ख़तरा घटाने के लिए सीधा निशाना यही मान होता है।
HDL Cholesterol HDL
अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल वापस लिवर तक ले जाने वाला अंश; भारतीयों में यह स्वाभाविक रूप से कम मिलना आम है।
Triglycerides TG
खून में घूमती वसा; पिछली रात का खाना और शराब सीधा असर डालते हैं, इसलिए उपवास ज़रूरी है।
VLDL Cholesterol VLDL
ट्राइग्लिसराइड ढोने वाला अंश, जो भारतीय रिपोर्ट में गणना से छपता है और लगभग उसी के साथ चलता है।

थायरॉइड, आयरन, विटामिन और सूजन

TSH
पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला संकेत हार्मोन; थायरॉइड की गड़बड़ी में यही सबसे पहले और सबसे साफ़ बदलता है।
Free T4 FT4
खून में मुक्त रूप में घूमता थायरॉइड हार्मोन; TSH बिगड़ा हो तो गड़बड़ी की गंभीरता यही बताता है।
Serum Iron
उस घड़ी खून में मौजूद आयरन; दिन भर ऊपर-नीचे होता रहता है, इसलिए सुबह ख़ाली पेट का नमूना बेहतर है।
Ferritin
शरीर के आयरन भंडार का माप; संक्रमण या सूजन में भंडार ख़ाली होने पर भी झूठा ऊँचा दिख सकता है। गाइड पढ़ें
Total Iron Binding Capacity TIBC
आयरन बाँधने की खून की कुल क्षमता; आयरन की कमी में बढ़ती है और फेरिटिन की तस्वीर पूरी करती है।
Vitamin B12
नसों और लाल कोशिकाओं के बनने के लिए ज़रूरी विटामिन; शाकाहारी आहार में इसकी कमी भारत में बहुत आम है। गाइड पढ़ें
Vitamin D (25-OH)
विटामिन D का भंडारित रूप; धूप वाले देश में भी भारतीय शहरों में इसकी कमी अपवाद नहीं, आम बात है।
C-Reactive Protein CRP
सूजन के जवाब में लिवर बनाता है यह प्रोटीन; घंटों में बढ़ता है, इसलिए ताज़ा संक्रमण में ESR से तेज़।

बीमारियाँ और रिपोर्ट

जिन बीमारियों में ये पैरामीटर हिलते हैं

खून की जाँच किसी बीमारी का नाम नहीं लिखती; वह सिर्फ़ यह बताती है कि शरीर के किस हिस्से पर ध्यान देना चाहिए। नीचे भारत में सबसे ज़्यादा खोजी जाने वाली स्थितियाँ हैं, और हर एक के साथ वे पैरामीटर जो उसकी तस्वीर बनाने में हिस्सा डालते हैं।

आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया

भारत में सबसे आम कमी, ख़ासकर किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन के साथ छोटा MCV, बढ़ा RDW और घटा फेरिटिन मिलकर भंडार ख़ाली होने का संकेत देते हैं, पर कारण ढूँढ़ना डॉक्टर का काम रहता है।

HemoglobinMCVRDWFerritinSerum IronTIBC

थैलेसीमिया ट्रेट

भारत के कई समुदायों में यह वंशानुगत लक्षण आम है और अक्सर आयरन की कमी समझकर वर्षों तक गोली खाई जाती है। यहाँ MCV बहुत कम होने के बावजूद लाल कोशिकाओं की संख्या ठीक या ऊँची रहती है और फेरिटिन सामान्य मिलता है, जिसके बाद हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस की बात आती है।

HemoglobinMCVMCHTotal RBC CountRDWFerritin

विटामिन B12 की कमी

थकान, हाथ-पैर में झुनझुनी और भुलक्कड़पन के पीछे यह कमी शाकाहारी आहार वाले भारत में बहुत आम है। रिपोर्ट में B12 का स्तर सीधा मापा जाता है, जबकि बड़ा MCV और गिरता हीमोग्लोबिन बताते हैं कि कमी ने खून बनने पर असर डालना शुरू कर दिया है।

Vitamin B12MCVHemoglobinPlatelet Count

विटामिन D की कमी

हड्डियों और पिंडलियों का दर्द, कमज़ोरी और थकान इसके साथ जुड़े रहते हैं, और दफ़्तर में बैठकर काम करने वाले भारतीय शहरी लोगों में यह बेहद आम है। मापा भंडारित रूप यानी Vitamin D (25-OH) जाता है, जबकि ALP और कैल्शियम बताते हैं कि हड्डी का चयापचय भी प्रभावित हुआ या नहीं।

Vitamin D (25-OH)Serum CalciumAlkaline Phosphatase

प्रीडायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़

भारतीयों में शुगर की गड़बड़ी अक्सर कम उम्र और कम वज़न पर ही शुरू हो जाती है। फास्टिंग शुगर, खाने के बाद की शुगर और HbA1c एक साथ पढ़े जाने पर ही भरोसेमंद तस्वीर बनती है, और निदान की पुष्टि डॉक्टर दोहराई गई जाँच पर करता है।

Fasting Blood SugarPost Prandial Blood SugarHbA1cTriglycerides

फैटी लिवर

बिना शराब पिए भी लिवर में चर्बी जमना अब भारत में सबसे आम लिवर समस्या है और प्रायः किसी चेकअप में संयोग से पकड़ा जाता है। हल्का बढ़ा SGPT, उससे कम बढ़ा SGOT और साथ चलते ट्राइग्लिसराइड व HbA1c मिलकर शक पैदा करते हैं, जिसकी पुष्टि अल्ट्रासाउंड से होती है।

SGPTSGOTGamma GTTriglyceridesHbA1c

पीलिया और हेपेटाइटिस

आँखों और पेशाब का पीला होना बिलीरुबिन बढ़ने का संकेत है, जिसके कारण वायरल हेपेटाइटिस से लेकर पित्त की नली में रुकावट तक हो सकते हैं। कुल और डायरेक्ट बिलीरुबिन का अनुपात, एंज़ाइम की ऊँचाई और ALP मिलकर दिशा तय करते हैं, पर वायरस की पहचान अलग जाँच से होती है।

Total BilirubinDirect BilirubinSGPTSGOTAlkaline Phosphatase

हाइपोथायरॉइडिज़्म और हाइपरथायरॉइडिज़्म

थकान, वज़न बढ़ना और ठंड न सह पाना कम सक्रिय थायरॉइड की ओर जाते हैं; धड़कन तेज़ होना, घबराहट और वज़न घटना उलटी दिशा में। TSH पहला संकेत देता है और Free T4 बताता है कि गड़बड़ी कितनी गहरी है।

TSHFree T4Total CholesterolHemoglobin

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़

लंबी डायबिटीज़ और बीपी के बाद किडनी की छानने की क्षमता चुपचाप घटती है और शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होता। क्रिएटिनिन के साथ eGFR की गिरावट, बढ़ी यूरिया और साथ चलता एनीमिया मिलकर तस्वीर बनाते हैं, जिसे पेशाब की जाँच और दोहराए माप के बिना पक्का नहीं कहा जाता।

Serum CreatinineeGFRBlood UreaSerum PotassiumHemoglobin

डेंगू

मानसून के बाद भारत में यह सबसे आम बुखार बन जाता है और CBC में इसकी छाप ख़ास होती है। प्लेटलेट और श्वेत कोशिकाओं का एक साथ गिरना, PCV का बढ़ना और हल्का बढ़ा SGPT संकेत देते हैं, जबकि पुष्टि NS1 या एंटीबॉडी जाँच से होती है।

Platelet CountTotal Leucocyte CountPCVLymphocytesSGPT

टाइफ़ॉइड और बैक्टीरियल संक्रमण

लगातार बुखार में बैक्टीरियल वजह सोचते समय श्वेत कोशिकाओं का बढ़ना और न्यूट्रोफिल का हिस्सा बढ़ना दिशा देते हैं, हालाँकि टाइफ़ॉइड में गिनती उलटा कम भी हो सकती है। CRP तेज़ी से बढ़ता है, पर जीवाणु की पहचान कल्चर या Widal जैसी अलग जाँच से ही होती है।

Total Leucocyte CountNeutrophilsC-Reactive ProteinESR

टीबी और लंबी चलने वाली सूजन

हफ़्तों की खाँसी, हल्का बुखार और वज़न घटना भारत में टीबी की आशंका उठाते हैं। खून की जाँच इसे कभी साबित नहीं करती, पर लगातार ऊँचा ESR, घटा हीमोग्लोबिन, कम एल्ब्युमिन और बढ़े मोनोसाइट यह बताते हैं कि शरीर में कोई लंबी प्रक्रिया चल रही है।

ESRHemoglobinAlbuminMonocytesC-Reactive Protein

गाउट और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड

अंगूठे या टख़ने के जोड़ में रात को अचानक तेज़ दर्द गाउट का चिर-परिचित रूप है। सिर्फ़ यूरिक एसिड ऊँचा होना गाउट नहीं कहलाता, और दौरे के समय तो यह सामान्य तक दिख सकता है, इसलिए CRP, ESR और किडनी के मान साथ देखे जाते हैं।

Uric AcidC-Reactive ProteinESRSerum Creatinine

डिसलिपिडेमिया और हृदय रोग का ख़तरा

भारतीयों में हृदय रोग औसतन दस साल पहले शुरू होता है, और इसमें ऊँचे ट्राइग्लिसराइड के साथ कम HDL का मेल ख़ास तौर पर देखा जाता है। लिपिड प्रोफ़ाइल अकेले ख़तरा नहीं बताती; उम्र, बीपी, धूम्रपान और शुगर के साथ मिलाकर ही डॉक्टर जोखिम आँकते हैं।

LDL CholesterolHDL CholesterolTriglyceridesTotal CholesterolHbA1c

ईओसिनोफीलिया — कृमि संक्रमण और एलर्जी

भारतीय रिपोर्ट में बढ़े हुए ईओसिनोफिल बहुत आम हैं और इनके पीछे पेट के कीड़े, त्वचा की एलर्जी या दमा हो सकता है। गिनती के साथ हीमोग्लोबिन देखना ज़रूरी है, क्योंकि लंबे कृमि संक्रमण में खून की कमी भी साथ चलती है।

EosinophilsTotal Leucocyte CountHemoglobinFerritin

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रिपोर्ट की PDF या मोबाइल से खींची तस्वीर भेज दीजिए। विश्लेषण हर पैरामीटर को आपकी अपनी शीट पर छपी संदर्भ सीमा के साथ रखता है, हटे हुए मानों को जुड़े दूसरे पैरामीटर के साथ समझाता है, और यह भी बताता है कि डॉक्टर से कौन-सी बात पूछनी चाहिए।

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यह विश्लेषण स्वास्थ्य संबंधी जानकारी है, निदान नहीं, और डॉक्टर की जाँच की जगह नहीं लेता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लैब वैल्यू और रिपोर्ट के बारे में

संदर्भ सीमा स्वस्थ लोगों के बीच के पंचानबे प्रतिशत हिस्से को घेरती है। इसका सीधा मतलब यह है कि हर बीस में से एक पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति भी उस सीमा से बाहर निकलता है, बिना किसी बीमारी के। इसलिए बिना लक्षण वाले व्यक्ति में एक वैल्यू का थोड़ा-सा बाहर चला जाना आमतौर पर दोहराकर देखने की बात होती है, घबराने की नहीं। असली मतलब तब बनता है जब आपस में जुड़े कई पैरामीटर एक ही दिशा में हिलें, या कोई एक पैरामीटर कई जाँचों में लगातार उसी दिशा में खिसकता रहे।

हाँ, ये वही एंज़ाइम हैं, बस पुराने नामों से। SGPT का नया नाम ALT है और SGOT का AST। भारत की ज़्यादातर लैब अब भी पुराने नाम छापती हैं, कुछ नए संक्षेप लिखती हैं, और कई तो दोनों साथ-साथ छाप देती हैं। SGPT लिवर कोशिका के लिए ज़्यादा ख़ास है, जबकि SGOT हृदय और कंकाल की मांसपेशियों में भी होता है, इसलिए भारी कसरत के बाद भी बढ़ सकता है। इन दोनों को Gamma GT के साथ पढ़ने पर ही व्याख्या की दिशा तय होती है।

CBC के लिए ख़ाली पेट रहने की ज़रूरत नहीं है। आठ से बारह घंटे का उपवास फास्टिंग शुगर, ट्राइग्लिसराइड और पूरी लिपिड प्रोफ़ाइल के लिए माँगा जाता है। पानी पीना मना नहीं है, बल्कि उससे नस मिलना आसान होता है। नमूना लेने का समय भी मायने रखता है: Serum Iron सुबह लिया जाना चाहिए क्योंकि यह दिन भर बदलता रहता है, और सुबह की चीनी वाली चाय भर से फास्टिंग शुगर की रिपोर्ट अमान्य हो जाती है।

क्योंकि संदर्भ सीमा उस लैब की मशीन और विधि पर निर्भर करती है। लैब जब अपना विश्लेषक बदलती है तो ये सीमाएँ भी बदल जाती हैं, जबकि आपके शरीर में कुछ नहीं बदला होता। इसलिए किसी मान को हमेशा उसी सीमा से मिलाइए जो आपकी अपनी रिपोर्ट में अंक के बग़ल में छपी है, इंटरनेट पर मिली किसी तालिका से नहीं। अगर आप किसी चीज़ पर नियमित नज़र रख रहे हैं तो जहाँ तक हो सके एक ही लैब से जाँच कराइए, ताकि दिखने वाला बदलाव सचमुच शरीर का हो।

फास्टिंग शुगर उस एक पल की तस्वीर है जब खून लिया गया, इसलिए पिछली रात का खाना, कम नींद, तनाव और चल रही कोई बीमारी उस पर असर डालते हैं। HbA1c पिछले दो से तीन महीनों का औसत दिखाता है, इसलिए रोज़ के उतार-चढ़ाव से नहीं हिलता। दोनों साथ पढ़ने पर तस्वीर कहीं ज़्यादा भरोसेमंद बनती है। ध्यान रहे कि एनीमिया, गर्भावस्था, थैलेसीमिया और कुछ अन्य रक्त विकार HbA1c को भ्रामक बना सकते हैं; ऐसे में डॉक्टर दूसरी जाँच माँगते हैं।

नहीं। साफ़ रिपोर्ट कुछ आशंकाओं को ज़रूर छोटा कर देती है, जैसे स्पष्ट एनीमिया या चल रहा बैक्टीरियल संक्रमण, लेकिन यह कैंसर और बहुत-सी दूसरी पुरानी बीमारियों को बाहर नहीं करती। अगर कोई शिकायत बनी हुई है तो सारी वैल्यू संदर्भ सीमा में होने के बावजूद डॉक्टर से उसकी जाँच करानी चाहिए। खून की जाँच स्वास्थ्य की तस्वीर का एक अहम हिस्सा है, पूरी तस्वीर नहीं।

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यह लेख स्वास्थ्य जानकारी है, चिकित्सकीय निदान नहीं। अपनी रिपोर्ट पर हमेशा डॉक्टर से चर्चा करें।